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तू गंगा की मौज मैं जमुना की धारा – वायलिन पर

नौशाद साहब के जादुई संगीत से रचा-बसा गीत, ‘तू गंगा की मौज मैं जमुना की धारा’ को  पाकिस्तान के फनकार रईस खान ने वायलिन पर चौंकाने वाली बारीकी के साथ पेश किया है। 
नौशाद की इस अमर रचना में खासकर “हो जी होsssss…!” की पुकार तो चमत्कृत ही कर देती है। लोकधुन पर आधारित यह गीत 63 साल बाद भी  उतना ही ताजा लगता है। अगर आप अच्छे संगीत के शैदाई हैं, तो पूरा गीत जरूर सुनिए